किनारे छूट जाते है

timeबूरा जब वक़्त आता है, सहारे छूट जाते हैं।
जो हमदम बनते थे हरदम, वो सारे छूट जातेहै।

बड़ा दावा करें हम तैरने का जो समंदर से,
फ़सेँ जब हम भँवर में तो, किनारे छूट जाते है।

जो चंदा को ग्रहण लग जाये, सूरज साथ छोडे तो,
वो ज़गमग आसमाँ के भी सितारे छूट जाते है।

जिन्हें पैदा किया, पाला, बडे ही चाव से हमने।
जवानी की उडानों में, दूलारे छूट जाते है।

जो दिल में दर्द हो ग़र्दीश में जीवन आ गया हो तब,
कभी लगते थे वो सुंदर, नज़ारे छूट जाते है।

जो दौलत हाथ में हो तब, पतंगा बन के वो घूमे,
चली जाये जो दौलत तो वो प्यारे छूट जाते है।

मुसीबत में ही तेरे काम कोइ आये ना ‘रज़िया”
यकीनन दिल से अपने ही हमारे छूट जाते है।

इरशाद न कर

 

         जो चला वक्त  उसी वक्त को तूँ याद न कर।

बीती पलकों में यूं ही जिन्दगी बरबाद न कर।

 भूल जा भुले हुए रिश्तों को जो छोड़ चले।

उनकी यादों की ज़हन में बडी तादाद न कर।

 ना मिलेगा तुज़े ये बात कहेगा सब को।

अपने दर्दों की परायों से तुं फरियाद न कर।

 जो नहिं उसके ख़ज़ाने में तुज़े क्या देगा?

ना दिलासा ही सही उससे युं इमदाद न कर।

 राज़जब कोई गज़ल छेड दे ज़ख़्मों को तेरे।

तुं उसी शेर के शायर को ही इरशाद न कर।