तिरंगा लहराया है।

 

देख़ो भारतवालो देख़ो, फ़िर आज़ तिरंगा छाया है।

है पर्व देश का आज यहाँ, ये याद दिलाने आया है।

रंग है केसरीया क्रांति का, और सफ़ेद है जो शांति का।

हरियाला रंग है हराभरा, पैग़ाम देशकी उन्नति का।

अशोकचक्र ने भारत को प्रगति करना जो सिखाया है।

देख़ो भारतवालो देख़ो ।

वो वीर सिपाही होते हैं,सरहद पे शहीदी पाते है।

वो भारत के शुरवीर शहीद सम्मान राष्ट्र का पाते है।

वो बडे नसीबोंवाले है, मरने पर जिन्हें उढाया है।

 देख़ो भारतवालो देख़ो।

हम वादा करते है हरदम, सम्मान करेंगे इसका हम।

चाहे जो जान चली जाये, पीछे ना हटेंगे अपने क़दम।

जन-गण-मन गीत सभी ने फ़िर एक ऊंचे सुर में गाया है।

 देख़ो भारतवालो देख़ो।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक, बंगाल से कच्छ की ख़ाडी तक।

उत्तर से दक्षिण, पष्चीम से पूरब की हर हरियाली तक।

हर और तिरंगा छाया है, और भारत में लहराया है।

 देख़ो भारतवालो देख़ो।

 
 

 

 

 

 

 

मेरा वतन याद आया।

                         

                                                                         मेरा वतन याद आया।

 

 

मेरे ख्वाब में आके किसने जगाया।

मुझे आज मेरा वतन याद आया।

जो भुले थे वो आज फिर याद आया।

   मुझे आज म्रेरा वतन याद आया।

वो गांवों के खेतों के पीपल के नीचे।

वो नदीया किनारे के मंदिर के पीछे।

वो खोया हुआ अपनापन याद आया।

   मुझे आज मेरा वतन याद आया।

वो सखियों सहेली कि बातें थीं न्यारी।

वो बहना की छोटी-सी गुडिया जो प्यारी।

वो बचपन की यादों ने फिर से सताया।

   मुझे आज मेरा वतन याद आया।

वो भेडों की,ऊंटों की लंबी कतारें।

वो चरवाहों की पीछे आती पुकारें।

कोई बंसरी की जो धून छेड आया।

   मुझे आज मेरा वतन याद आया।

वो बाबुल का दहेलीज पे आके रूकना।

वो खिड़की के पीछे से भैया का तकना।

जुदाई की घडीयों ने फिर से रुलाया।

   मुझे आज मेरा वतन याद आया।

मेरे देश से आती ठंडी हवाओ,

मुझे राग ऐसा तो कोई सुनाओ।

जो बचपन में था अपनी मां ने सुनाया।

   मुझे आज मेरा वतन याद आया।

    

सरहद की आवाज़

         तैयार सिपाही हो जा

 

सरहद ने दी आवाज़,

तैयार सिपाही हो जा।

दुश्मन ना आया बाज़

तैयार सिपाही हो जा।

 

है ऑधी चली उधर से, ये धुंधला हुआ समॉ है।

ये फिज़ाओं में डर कैसा? ये सुर्ख़ आसमॉ क्यों है?

आफत का है आग़ाज़ !… तैयार सिपाही हो जा।

 

माथे पे लगाके टीका,मॉ-बाप की आशिष ले ले,

बच्चों को उठाके गोदी, कुछ प्यार दे थोड़ा ले ले।

पत्नी को बतादे राज़,… तैयार सिपाही हो जा।

 

बहना से बंधवा राख़ी,वो रहना जाये बाक़ी।

यारों से करले मस्ती, फिर मिले ना ऐसी बस्ती।

ये गॉव ना हो नाराज़!… तैयार सिपाही हो जा।

 

तेरी चाल में शान हो ऐसी ,एक वीर सिपाही जैसी!

तेरी ऑख में गरमी ऐसी, एक वीर सिपाही जैसी!

वाह! क्या तेरा अंदाज़!… तैयार सिपाही हो जा।

 

वर्दी को बदन पे अपनी, तू कफ़न समझकर पहन ले।

भारत के वीर सिपाही, ये वतन का जतन करले।

और हो जा तू परवाज़!… तैयार सिपाही हो जा।

 

मेरे लाख़ प्रणाम वो मॉ पर, तुझे जिसने जनम दीया है।

मेरे लाख़ प्रणाम पिता पर ,तेरा जिसने जतन किया है।

तुझ पे है बड़ा हमें नाज़!… तैयार सिपाही हो जा।

 

मेरे वतन

मेरे वतन

 

मेरे वतन,मेरे वतन, मेरे वतन हिंदोस्ताँ।

अपना गगन, अपना चमन, अपना वतन हिंदोस्तां।

गाते रहें ये गीत हम, बढते रहें अपने कदम,

सब साथ है तो क्या है गम,जीतेंगे हम,हम में है दम।

मेरे वतन………

हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं, यहां शिख़ भी ईसाइ भी,

एसे रहें हम संग-संग जैसे रहे परछाई भी।

मेरे वतन……….

यहां मंदिरों में आरती और मस्जिदों में अज़ान है,

गीता के श्लोक यहां कभी, कभी आयतॆं क़ुरान है।

मेरे वतन………..

त्यौहारों का ये देश है, यहां ईद और दीवाली है,

रंगत यहां राख़ी की है और रंगबिरंगी होली है।

मेरे वतन……….

गंगा यमुना सरस्वती, गोदावरी और नर्मदा,

नदियां हमारे देश की, बहती रहें हरदम सदा।

मेरे वतन…………

ये धरती गांधी-नहेरु की, ये धरती है सरदार की

जिसने दी अपनी जान भग़तसिंह और आज़ाद की।

मेरे वतन………….

कश्मीर से कन्याकुमारी तक बसा मेरा वतन,

नज़रें उठाये कोई क्या?ईस पे लुटा दें जानो तन।

मेरे वतन………