About

Image000मै रज़िया अकबर मिर्ज़ा. एक सायन्स विद्यार्थीनी,एक सरकारी अस्पताल में ब तौर फार्मासीस्ट कार्यरत,पर बचपन से ही साहित्य प्रति लगाव।

शब्दों से शब्द जोडने कि कोशिश, अस्पताल में मरीज़ों की स्थिति,बचपन,यौवन तथा बुढापे को हररोज़ नज़दीक से देखना,महेसुस  करना,और उनके जीवन की ग़हराईयों में झांकने की कोशिश, इन्ही संवेदनाओं से जन्म लिया एक “राज़”ने।साहित्य के प्रति मेरा प्रेम बढता ही रहा।”हरिवंशराय बच्चन”,रविन्द्रनाथ टैगोर,आदिल मन्सूरी’जैसे मेरे प्रिय कविओं की रचनाओं से और संवेदना मिली।

भारतप्रेम का संदेश लिये आज आपके सामने हुं।गुजरात के आणंद जिले की पेटलाद में रहती_बसती हुं। मेरी पहली गुजराती काव्यपुस्तिका “क्षितिज” का विमोचन 2005में तथा हिन्दी देशभक्ति गीत “मेरे वतन”का विमोचन फेब्रुआरी2008 में हुआ।

अपने वेबब्लोग पर अपनी रचनाऎ पेश करती रहुंगी।आशा करती हुं मेरे साहित्यप्रेमी साथी मेरे ब्लोग से रूबरू होते रहेंगे।

आपकी….रज़िया अकबर मिर्ज़ा


17 टिप्पणियाँ

  1. अब्दुल हफीज़ खान
    रजिया जी आपका व्लोग्स पढ़े काफी अच्छे लगे। खुदा से यही दुआ है कि आप इसी तरह और भी अच्छे ब्लोग्स लिखते रहें। आपका तो कोई ई-मेल आई ड़ी नही है लेकिन आप मेरा मेल आई डी नोट कीजिएः-Abdul0471@gmail.com,
    आपके जबाब का इंतजार में अब्दुल हफीज खान, दिल्ली-25

  2. रजिया जी आपका व्लोग्स पढ़े काफी अच्छे लगे। खुदा से यही दुआ है कि आप इसी तरह और भी अच्छे ब्लोग्स लिखते रहें। आपका तो कोई ई-मेल आई ड़ी नही है लेकिन आप मेरा मेल आई डी नोट कीजिएः-Abdul0471@gmail.com,
    आपके जबाब का इंतजार में अब्दुल हफीज खान, दिल्ली-25

  3. रजिया जी,
    रजिया जी आपका यह ब्लाग वर्डप्रेस के हिंदी डेशबोर्ड पर कभी नहीं दिखा। अपनी सैटिंग चेक करें और जहां भाषा का विकल्प हो वहां हिंदी भर दें तो यह वहां हमें रोज दिखाई देगा और इस सभी हिंदी ब्लाग लेखक भी पढ़ पायेंगे। हो सकता है कि मैंने ही नहीं देख् हो। हां अगर ऊपर नाम हिंदी देवानगरी में भी लिख दें तो कैसा रहेगा? अंग्रेजी और हिंदी दोनों में बना रहे तो कोई बुरा नहीं है।
    दीपक भारतदीप

  4. Hi Razia,

    bahut khushi hui aapka comment mere blog mein padhkar! Aapki poem abhi padhi…..sara to nahi bus ek padhi hun. Jaankar apaar khushi hui ki aap apni poems publish bhi kar chuki hein. Aap medical line mein hein yeh jankar bhi achha laga. Asha karti hun aap mere blog per aate rahengi….no doubt main to aaungi hi akhir aapki poems jo padhni hai.

    Ek request hai aap apna blog link plz yahan dal dijiye taki main aasani se aapke blog mein aati rahun aur mere readers ko bhi aasani hogi yahan aane mein.
    http://rewa.wordpress.com/blogroll/

    Dil se kah rahi hun mujhe achha laga aapka comment padhkar.
    shukriya!

    thnx & rgds.
    Rewa Smriti

  5. Shukriya aapne jo hamara sath diya.

    Mai manta hu ki jo gazal ya git padhneme ya sunneme itna maja aata hai to usko samajkar ganeme kitna maja aata hoga.

    Urdu ya Hindi Hame pasand hai Kutch labzs Urduke (uska matlab) ham bhi jate hai.

    Aasi kavitaye gazale padhte hai to man ko kutch sukun milta hai. Baki to aaj ke daur me tanav tanav hai.

    fir se ekbar Shukriya.
    Ho shake to aap hamare mail ke zariye baat kar shakti hai.

    Jayesh


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