इरशाद न कर

 

         जो चला वक्त  उसी वक्त को तूँ याद न कर।

बीती पलकों में यूं ही जिन्दगी बरबाद न कर।

 भूल जा भुले हुए रिश्तों को जो छोड़ चले।

उनकी यादों की ज़हन में बडी तादाद न कर।

 ना मिलेगा तुज़े ये बात कहेगा सब को।

अपने दर्दों की परायों से तुं फरियाद न कर।

 जो नहिं उसके ख़ज़ाने में तुज़े क्या देगा?

ना दिलासा ही सही उससे युं इमदाद न कर।

 राज़जब कोई गज़ल छेड दे ज़ख़्मों को तेरे।

तुं उसी शेर के शायर को ही इरशाद न कर।