क्यों कैसी रही? आज? बड़ा ग़ुरूर था अपने आप पर!! आज नर्म हो गये ना? वक़्त कब और कैसे अपना रुख़ बदलेगा किसी को पता नहिं है। और फ़िर अहंकार तो सबसे बूरी बात है। सब कोइ कहता था कि आप से ही मैं हुं। आप के बिना मेरा कोइ वज़ुद नहिं। मैं हमेशाँ ख़ामोश [...]
Archive for the ‘Uncategorized’ Category
क्यों कैसी रही!!!
Posted in समाज रस, Uncategorized, tagged समाज रस on जुलाई 22, 2009 | 6 Comments »
रिश्तों का मोल
Posted in पधभाव तरंग, Uncategorized on सितम्बर 6, 2008 | 1 Comment »
क्यों देर हुई साजन तेरे यहाँ आने में? क्या क्या न सहा हमने अपने को मनानेमें। तुने तो हमें ज़ालिम क्या से क्या बना डाला? अब कैसे यकीँ कर लें, हम तेरे बहाने में। उम्मीदों के दीपक को हमने जो जलाया था। तुने ये पहल कर दी, क्यों उसको बुज़ाने में। [...]
मुस्कुराता तू चलाजा
Posted in समाज रस, Uncategorized on जुलाई 31, 2008 | 5 Comments »
आदमी है, आदमी से मिल मिलाता तू चलाजा। गीत कोइ प्यार के बस गुनगुनाता तू चलाजा। गर तुझे अँधियारा राहों में मिले तो याद रख़, हर जगह दीपक उजाले के जलाता तू चलाजा। जो तुझे चूभ जायें काँटे, राह में हो बेखबर, अपने हाथों से हटा कर, गुल [...]
तलाश
Posted in पधभाव तरंग, Uncategorized on जून 25, 2008 | 7 Comments »
तलाश सफर में ख़ो गई मंज़िल,उसे तलाश करो।. किनारे छूटा है साहिल, उसे तलाश करो।. था अपना साया भी इस वक़्त साथ छोड़ गया।. कहॉ वो हो गया ओझल उसे तलाश करो। ना ही ज़ख़म,ना तो है खून फिर भी मार गया। कहॉ छुपा है [...]
