Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for the ‘प्रकृति रस’ Category

प्रहर

        अंधेरे हैं भागे प्रहर हो चली है। परिंदों को उसकी ख़बर हो चली है।   सुहाना समाँ है हँसी है ये मंज़र। ये मीठी सुहानी सहर हो चली है।   कटी रात के कुछ ख़यालों में अब ये। जो इठलाती कैसी लहर हो चली है।   जो नदिया से मिलने की चाहत है [...]

Read Full Post »

मौसम

                                   आया मौसम बड़ा ही सुहाना।(2) ले के आया है कोई ख़ज़ाना।…आया मौसम…   आसमॉं पे है बदरी जो छाई, जैसे काली-सी चादर बिछाई। डूबा मस्ती में सारा ज़माना।हो…(2)  ले के आया है कोई ख़जाना।…आया मौसम…    आज बादल से बरख़ा गीरि है।  सुख़ी धरती को ठंडक मिली है।  कैसे निकला है धरती [...]

Read Full Post »

कारवॉ

        कारवॉ     मेरे पंख मुज़से न छीनलो,  मुझे आसमॉ की तलाश है। मैं हवा हूँ मुझको न बॉधलो , मुझे ये समॉ की तलाश है।     मुझे मालोज़र की ज़रुर क्या? मुझे तख़्तो-ताज न चाहिये ! जो जगह पे मुज़को सुक़ुं मिले, मुझे वो जहाँ की तलाश है।     मैं तो [...]

Read Full Post »

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.