About: "रज़िया" मिर्ज़ा
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- सायन्स की विध्यार्थीनी पर मन हंमेशाँ कला की ओर, यही शोख़ ख़िंच लाया मुज़े कविताओं के पास। क़ुदरत के हर पल को, हर वज़ुद को ज़ी भर के ज़ीना चाहती हुं। एक सरकारी अस्पताल में काम करते-करते ग़रीबों, क़मज़ोरों और मज़बूर मरीज़ों के इतने नज़दीक पहोंच गइ कि मेरी कविताओं ने जन्म ले लिया। और आज आपके सामने हुं।
