क्यों कैसी रही? आज? बड़ा ग़ुरूर था अपने आप पर!! आज नर्म हो गये ना? वक़्त कब और कैसे अपना रुख़ बदलेगा किसी को पता नहिं है। और फ़िर अहंकार तो सबसे बूरी बात है। सब कोइ कहता था कि आप से ही मैं हुं। आप के बिना मेरा कोइ वज़ुद नहिं। मैं हमेशाँ ख़ामोश [...]
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क्यों कैसी रही!!!
Posted in समाज रस, Uncategorized, tagged समाज रस on जुलाई 22, 2009 | 6 Comments »
