क्यों कैसी रही? आज? बड़ा ग़ुरूर था अपने आप पर!! आज नर्म हो गये ना? वक़्त कब और कैसे अपना रुख़ बदलेगा किसी को पता नहिं है। और फ़िर अहंकार तो सबसे बूरी बात है। सब कोइ कहता था कि आप से ही मैं हुं। आप के बिना मेरा कोइ वज़ुद नहिं। मैं हमेशाँ ख़ामोश [...]
Archive for जुलाई, 2009
क्यों कैसी रही!!!
Posted in समाज रस, Uncategorized, tagged समाज रस on जुलाई 22, 2009 | 6 Comments »
बुलबुल
Posted in सत्य कथा, tagged समाज रस on जुलाई 2, 2009 | 2 Comments »
तुम जा रही हो, अपने केरियर को एक नया रंग देने के लिये। तुम्हारी प्रगति से सब खुश हो रहे हैं। अभी एक साल पहले ही तो तुम ने एक कॉलेज में अपनी सर्विस शुरु की थी। अच्छी तन्ख्वाह भी मिल रही थी।यहाँ तक की मम्मी-पापा और भैया के साथ रहने को मिल रहा [...]
