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Archive for July, 2009

क्यों कैसी रही? आज?
बड़ा ग़ुरूर था अपने आप पर!!
आज नर्म हो गये ना?
वक़्त कब और कैसे अपना रुख़ बदलेगा किसी को पता नहिं है।
और फ़िर अहंकार तो सबसे बूरी बात है।
सब कोइ कहता था कि आप से ही मैं हुं।
आप के बिना मेरा कोइ वज़ुद नहिं।
मैं हमेशाँ ख़ामोश रहा।
या कहो कि मेने भी स्वीकार कर [...]

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         तुम जा रही हो, अपने केरियर को एक नया रंग देने के लिये। तुम्हारी प्रगति से सब खुश हो रहे हैं। अभी एक साल पहले ही तो तुम ने एक कॉलेज में अपनी सर्विस शुरु की थी। अच्छी तन्ख्वाह भी  मिल रही थी।यहाँ तक की मम्मी-पापा और भैया के साथ रहने को मिल रहा [...]

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