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Archive for September, 2008

बूरा जब वक़्त आता है, सहारे छूट जाते हैं।
जो हमदम बनते थे हरदम, वो सारे छूट जातेहै।
बड़ा दावा करें हम तैरने का जो समंदर से,
फ़सेँ जब हम भँवर में तो, किनारे छूट जाते है।
जो चंदा को ग्रहण लग जाये, सूरज साथ छोडे तो,
वो ज़गमग आसमाँ के भी सितारे छूट जाते है।
जिन्हें पैदा किया, पाला, बडे [...]

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झुमती गाती और गुनगुनाती गज़ल,गीत कोइ सुहाने सुनाती गज़ल।
ज़िंदगी से हमें है मिलाती गज़ल,
उसके अशआर में एक इनाम है,उसके हर शेर में एक पैगाम है।
सबको हर मोड पे ले के जाती गज़ल।
उसको ख़िलवत मिले या मिले अंजुमन। उसको ख़िरमन मिले या मिले फ़िर चमन,

वो बहारों को फ़िर है ख़िलाती गज़ल।
[...]

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         जो चला वक्त  उसी वक्त को तूँ याद न कर।
बीती पलकों में यूं ही जिन्दगी बरबाद न कर।
 भूल जा भुले हुए रिश्तों को जो छोड़ चले।
उनकी यादों की ज़हन में बडी तादाद न कर।
 ना मिलेगा तुज़े ये बात कहेगा सब को।
अपने दर्दों की परायों से तुं फरियाद न कर।
 जो नहिं उसके ख़ज़ाने में तुज़े [...]

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अंधेरे हैं भागे प्रहर हो चली है।
परिंदों को उसकी ख़बर हो चली है।
 
सुहाना समाँ है हँसी है ये मंज़र।
ये मीठी सुहानी सहर हो चली है।
 
कटी रात के कुछ ख़यालों में अब ये।
जो इठलाती कैसी लहर हो चली है।
 
जो नदिया से मिलने की चाहत है उसकी।
उछलती मचलती नहर हो चली है।
 
सुहानी-सी रंगत को अपनों में [...]

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 क्यों देर हुई साजन तेरे यहाँ आने में?
क्या क्या न सहा हमने अपने को मनानेमें।
तुने तो हमें ज़ालिम क्या से क्या बना डाला?
अब कैसे यकीँ कर लें, हम तेरे बहाने में।
                      उम्मीदों के दीपक को हमने जो जलाया था।
                      तुने ये पहल कर दी, क्यों उसको बुज़ाने में।
                      बाज़ारों में बिकते है, हर मोल नये रिश्ते।
                      [...]

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