देख़ो भारतवालो देख़ो, फ़िर आज़ तिरंगा छाया है।
है पर्व देश का आज यहाँ, ये याद दिलाने आया है।
रंग है केसरीया क्रांति का, और सफ़ेद है जो शांति का।
हरियाला रंग है हराभरा, पैग़ाम देशकी उन्नति का।
अशोकचक्र ने भारत को प्रगति करना जो सिखाया है।
देख़ो भारतवालो देख़ो ।
वो वीर सिपाही होते हैं,सरहद पे शहीदी पाते है।
वो भारत [...]
Archive for August, 2008
तिरंगा लहराया है।
Posted in देशभक्ति रस on August 15, 2008 | 6 Comments »
माँ
Posted in समाज रस on August 7, 2008 | 7 Comments »
मेरी ख़ामोशीओं की गुंज सदा देती है।
तू सुने या ना सुने तुज़को दुआ देती है।
मैंने पलकों में छुपा रख्खे थे आँसू अपने।(2)
रोकना चाहा मगर फ़िर भी बहा देती है।
मैंने पाला था बड़े नाज़-मुहब्बत से तुझे(2)
क्या ख़बर जिंदगी ये उसकी सज़ा देती है।
तूँ ज़माने की फ़िज़ाओं में कहीं गुम हो चला(2)
तेरे अहसास की खुशबू ये हवा [...]
तरसना कैसा?
Posted in समाज रस on August 7, 2008 | 2 Comments »
ज़ाम जब पी ही लिया है तो सँभलना कैसा?
समंदर सामने है फ़िर अपना तरसना कैसा?
ख़ुलके जी लेते है वों फ़ुल भी कुछ पल के लिये।
हम भी जी लें ये बहारों में सिमटना कैसा?
ख़ुदको चट्टान की मजबूती से तोला था कभी !
तो क्यों ये मोम बने तेरा पिघलना कैसा?
सामने राह खुली है तो चलो मंजिल तक।
कारवाँ [...]
माया
Posted in पधभाव तरंग on August 2, 2008 | 4 Comments »
क्यों दौड रहा है किसी परछाइ के पीछे?
आगे तो ज़रा देख वो छाया तो नहीं है?
इतना तो न बन अँध, ओ नादान मुसाफिर !
क्या है ये हक़िकत या कि माया तो नहि है?
जिसको तु समज़ता है हमेंशा से ही अपना।
तेरा ही है या और-पराया तो नहिं है?
जुगनु की [...]
