Posted in प्रकृति रस on July 4, 2008 | 4 Comments »
कारवॉ
मेरे पंख मुज़से न छीनलो,
मुझे आसमॉ की तलाश है।
मैं हवा हूँ मुझको न बॉधलो ,
मुझे ये समॉ की तलाश है।
मुझे मालोज़र की ज़रुर क्या?
मुझे तख़्तो-ताज न चाहिये !
जो जगह पे मुज़को सुक़ुं मिले,
मुझे वो जहाँ की तलाश है।
मैं तो फ़ुल हूं एक बाग़ का।
मुझे शाख़ पे बस छोड दो।
में खिला अभी-अभी तो हूं।
मुझे [...]
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Posted in पधभाव तरंग on July 4, 2008 | 1 Comment »
वक़्त ने साथ छोड़ा हमारा जो था,
हाय तेरा, तड़पना मुझे याद है।
मुंह छिपाकर तेरा मेरी आगोश में,
हाय कैसा बिलख़ना मुझे याद है।…हॉ मुझे याद है।
प्यार की वादीओ में गुज़ारे जो पल,
कैसे दिल से ओ साथी भूला पायेंगे?
जिन लकीरों पे कस्मे जो खाइ थीं कल,
आज हम वो लकीरें मिटा पायेंगे?
उन रक़ीबों के ज़ुल्मों को मेरे सनम,
हाय [...]
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