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Archive for June, 2008

बचपन

बचपन हॉ हॉ ये बचपन।
नादान भोला ये बचपन।
कहीं ऑसु से भीगा ये बचपन।
कहीं पैसों में भीगा ये बचपन।
धूल-मिट्टी में खोया ये बचपन।
फ़ुटपाथसडक पर संजोया ये बचपन।
रेंकडी पर जुतों की पोलिश पर चमकता ये बचपन।
कहीं कुडेदान में खेलता ये बचपन।
कहीं गरम सुट में घुमता ये बचपन।
कहीं फ़टे कपडों में नंगा घुमता ये बचपन।
 कहीं मर्सीडीज़ कारों में [...]

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देख़ो लोगों मेरे जाने का है पैग़ाम आया..(2)
ख़ुदा के घर से है ये  ख़त, मेरे नाम आया….देख़ो लोगो…
 

जिसकी ख़वाहिश में ता-जिन्दगी तरसते रहे।
वो तो ना आये मगर मौत का ये जाम आया। ख़ुदा के घर…..
 

ज़िंदगी में हम चमकते रहे तारॉ की तरहॉ ।
रात जब ढल गइ, छुपने का ये मक़ाम आया। ख़ुदा के घर…..
 
राह तकते [...]

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यादें

पीछे मुड के हमने जब देख़ा ,गुज़रा वो ज़माना याद आया।
बीती एक कहानी याद आइ, बीता एक फ़साना याद आया।…..पीछे.

सितारों को छूने की चाहत में, हम शम्मे मुहब्बत भूल गये।(2)
जब शम्मा जली एक कोने में, हम को परवाना याद आया।…..पीछे.

शीशे के महल में रहकर हम, तो हँसना-हँसाना भूल गये।(2)
पीपल की ठंडी छाँव [...]

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  तलाश

सफर में ख़ो गई मंज़िल,उसे तलाश करो।.
 किनारे छूटा है साहिल, उसे तलाश करो।.
 
था अपना साया भी इस वक़्त साथ छोड़ गया।.
कहॉ वो हो गया ओझल उसे तलाश करो।
 
ना ही ज़ख़म,ना तो है खून फिर भी मार गया।
कहॉ छुपा है वो कातिल, उसे तलाश करो।
 
भूला चला है वक़्त जिन्दगी के लम्हों को।
मगर धड़कता है क्यों [...]

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ये शहर अब वों शहर नहीं,
 न जाने किसकी नज़र लगी?(2)
      
यहॉ झिलमिलाते चिराग थे,
यहॉ टिमटिमाते सितारे थे।
यहॉ रोज़ दिन में ईद थी,
यहॉ रात एक दीवाली थी।
अब यहॉ अमास का आसमॉ।…. न जाने किसकी नज़र लगी?(2)
 
यहॉ ऊंचे मकान थे,
कभी इस में भी इन्सान थे।
यहॉ महेफिलॉ में थी रोशनी,
यहॉ बज़ती थी हर रागिनी।
अब यहॉ है खंडहर [...]

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देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)
आसमान से बरसा पानी.. देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

पत्ते पेड़ हुए हरियाले।
पानी-पानी नदियां नाले।
धरती देख़ो हो गई धानी। देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

मेंढक ने जब शोर मचाया।
मुन्ना बाहर दौड़ के आया।
हंसके बोली ग़ुडीया रानी। देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

बिज़ली चमकी बादल गरज़े।
रिमझिम रिमझिम बरख़ा बरसे।
आंधी आई एक तुफ़ानी। देख़ो आई रुत मस्तानी..(2)

कोयल की कुउ,कुउ,कुउ [...]

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                                                                         मेरा वतन याद आया।
 
 
मेरे ख्वाब में आके किसने जगाया।
मुझे आज मेरा वतन याद आया।
जो भुले थे वो आज फिर याद आया।
   मुझे आज म्रेरा वतन याद आया।

वो गांवों के खेतों के पीपल के नीचे।
वो नदीया किनारे के मंदिर के पीछे।
वो खोया हुआ अपनापन याद आया।
   मुझे आज मेरा वतन याद आया।

वो सखियों –सहेली कि [...]

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                                        सवाल
मन में उठ्ठा एक सवाल,
आसमॉ गर होता लाल।
मछलियॉ आकाश में उड़ती !
पंछी सब धरती पर चलते !
ईंन्सानों के पंख जो होते !
प्राणी गाते सूर और ताल ।…मन में….
मुकुट  होता फकीर के सर पे !
और राजा के भिक्षा पात्र !
फ़कीर-साईं होते महाराजा !
महाराजा होते कंगाल !…मन में
सोने की जो खेती होती !
अमृत की जो बारिश [...]

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बंधन

 
ये बंधन टूटेना ।(2)
चाहे कोई बाधा आये, चाहे आये तूफ़ॉ ।
ये बंधन टूटेना ।(2)
साथ कभी छूटेना…ये बंधन टूटेना ।
ये बंधन टूटेना ।(2)
 
 
मेरी चाहत इतनी ग़हरी, जीतना सागर ग़हेरा।
मेरी चाहत इतनी ऊंची, जितना नभ ये ऊँचा।
हाथ कभी छूटेना…ये बंधन टूटेना ।
 
 तूँ मेरी साँसों में समाया, तू मेरी आहों में।
दिल की धड़कन नाम पुकारें, तेरा दिन-रातों में।
सांस [...]

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         तैयार सिपाही हो जा
 
सरहद ने दी आवाज़,
तैयार सिपाही हो जा।
दुश्मन ना आया बाज़ ‘
तैयार सिपाही हो जा।
 
है ऑधी चली उधर से, ये धुंधला हुआ समॉ है।
ये फिज़ाओं में डर कैसा? ये सुर्ख़ आसमॉ क्यों है?
आफत का है आग़ाज़ !… तैयार सिपाही हो जा।
 
माथे पे लगाके टीका,मॉ-बाप की आशिष ले ले,
बच्चों को उठाके गोदी, कुछ [...]

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मैं तो आऊंगी तेरी गली। चाहे कोइ कहे पग़ली। तू लेजा ना लेजा मुझे(2)मैं तो आऊंगी…
वादीओं में बसेरा मेरा, तुज़से हो सवेरा मेरा।(2)
मैं बनके ऊडुं तितली…तू लेजा ना लेजा मुझे। ये बंधन तूटेना ।
तुज़से हो उजाला मेरा, तू ही है सहारा मेरा।(2) तुज़से मैं बनी बिजली…तू लेजा ना लेजा मुझे।
ये बहारें तुम्हीं से ही हैं [...]

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    दुनिया एक मुसाफिरख़ाना है,कभी आना है, कभी जाना है।
    कोई मिलते है,कोई बिछडते है,यही तो एक अफसाना है।…दुनिया
 
    हम काम करें ये कुछ ऐसे कि लोग हमें भी याद करें।
    कोई याद करें जाने के बाद, यही बड़ा नज़राना है।…दुनिया
 
    कुछ पल यहां सुख के आते है, कुछ पल दु:ख के भी आते [...]

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