मेरे वतन,मेरे वतन, मेरे वतन हिंदोस्ताँ।
अपना गगन, अपना चमन, अपना वतन हिंदोस्तां।
गाते रहें ये गीत हम, बढते रहें अपने कदम,
सब साथ है तो क्या है गम,जीतेंगे हम,हम में है दम।
मेरे वतन………
हिंदू भी हैं, मुस्लिम भी हैं, यहां शिख़ भी ईसाइ भी,
एसे रहें हम संग-संग जैसे रहे परछाई भी।
मेरे वतन……….
यहां मंदिरों में आरती और मस्जिदों में अज़ान है,
गीता के श्लोक यहां कभी, कभी आयतॆं क़ुरान है।
मेरे वतन………..
त्यौहारों का ये देश है, यहां ईद और दीवाली है,
रंगत यहां राख़ी की है और रंगबिरंगी होली है।
मेरे वतन……….
गंगा यमुना सरस्वती, गोदावरी और नर्मदा,
नदियां हमारे देश की, बहती रहें हरदम सदा।
मेरे वतन…………
ये धरती गांधी-नहेरु की, ये धरती है सरदार की’
जिसने दी अपनी जान भग़तसिंह और आज़ाद की।
मेरे वतन………….
कश्मीर से कन्याकुमारी तक बसा मेरा वतन,
नज़रें उठाये कोई क्या?ईस पे लुटा दें जानो तन।
मेरे वतन………


khub ja saras kavita che je amne desh ni yad karave che je jemne apna desh mate prano ni ahuti api hati