कर्मयोगी
चलो जलायें दीप वहॉ,जहॉ अभी-भी अँधेरा है।
कदम बढाऎ उस पथ पर,जहॉ परिवर्तन का बसेरा है।
चलो जलायें..
मिलजुल कर हम काम करें तो एकता शकित पायेंगे।
कल का काम करें हम आज, ये नीति अपनाऎगे।(2)
आत्मचिंतन का पाठ पढें, क्या तेरा क्या मेरा है?
चलो जलायें…
अपना दायित्व पहचानें, आचार शुद्धि लायें जो।
अपने लक्ष्य को नाप लें गर हम,लक्ष्यशक्ति को पाये जो(2)
छोड़ खड़े हो कामचोरी को…(2) जिसने सब को घेरा है।
चलो जलायें…
कर्म सेवक है हम कर्मो के कर्मयोगी है अपना नाम।
ये मम भाव जीवन में उतारें,निष्ठा से देंगे अंजाम। (2)
विकास पथ की और चले…(2) जहां हो नया सवेरा है।
चलो जलायें…
कार्यकुशलता होगी हममें, हम सब कुछ पा लेंगे।
रक्षा अपनी करके ही हम, रक्षा शक्ति पा लेंगे। (2)
चिंतन शिबिरों से हमने…(2)
ये अभियान जो छेड़ा है…।
चलो जलायें…
कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
करता जा तू कर्म ओ “मानव”।
फल की चिंता मत करतू…।(2)
गीता का कर्मबोध ये शिखे…।(2)
फिर भारत ये सुनहरा है…।.
चलो जलायें…
।


मिलजुल कर हम काम करें तो एकता शकित पायेंगे।
कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
कृष्न-सखाने/मित्रने..
( उन्होने हमें दोस्त समझकर बाते कही है ना कि हिन्दु म्ुसलमा, ईसाई..जैन..)
यह भी कहा है..स्वकर्मणात्वम अभ्यर्च सिद्धि विन्दति मानवाः
यानि अपना कर्म ही पूजा या ईबादत बन जाये उतना अच्चा सच्चा कुशलतासे करे..
तो इन्सान सिद्धि यानि सफलता प्राप्त करता है…
मुझे बहोत अच्ची लगी आपकी सोच देश भक्ति, कर्मभक्ति
कुरान या गीता की शिक्षा हमे बेहतर बनाने के लिये है…
आप कहा पर हो ?
बहोत मुबारक.
मुझे यकीन नहीं होता इस खूबसूरत कविता को पढ़कर !
भारतीय समाज का यह चैलेन्ज लेने के लिए शुक्रिया, इस मुहिम में मैं आपके साथ हूँ !
चलो जलायें दीप वहॉ,जहॉ अभी-भी अँधेरा है।
कदम बढाऎ उस पथ पर,जहॉ परिवर्तन का बसेरा है।
चलो जलायें..
chalo karen swagat deep jala lo, aarti saza lo…..ki naya yug chala aa raha…..